विवाह क्यों




विवाह स्त्री ओर पुरुष के जीवन यात्रा की शुरुआत मानी जाती है ! पुरुष का वायां ओर स्त्री का दाहिना भाग मिलकर एक दूसरेकी शक्ति को पूरक बनाने की क्रिया को विवाह कहा जाता है ! भगवान विष्णु ओर पार्वती को अर्ध नारीश्वर की संज्ञा देना इसी बात का प्रमाण है ! संसार में संतान को बिना विवाह किये भी पैदा किया जा सकता है ! लेकिन संसारी मर्यादा का हनन न हो ,आने वाली संतान को इस बात का भान हो कि वह अमुक समाज कि वंस प्रणाली का हिस्सा है !

अपने पिता के स्वभाव के अनुसार कार्य व सामाजिक प्रणाली को चलाने कि छमता उसके अन्दर अपने आप पता लगे ,माता अपने पुत्रियों के साथ सम्मान के साथ रह सके ,पीछे चलने वाला समाज किसी भी प्रकार के सुख -दुःख में शामिल हो सके ,अपने समाज ओर कुल को आगे बढ़ाने के लिए पैदा होने वाला जातक चिंतित हो सके ! अपने पुत्र या पुत्री को पाल पोश कर उच्च से उच्च स्थान देने की हिम्मत माता पिता के अन्दर चल सके आदि कारणों के लिए विवाह किया जाता है ! अगर बिना विवाह के संतान पैदा की जावेगी तो वह अपने को नितांत अकेला समझ कर दूसरों को भी हेय दृष्टि से देखेगा ,उसे माँ,बहिन तथा दूसरी स्त्रियों के अन्दर भेद नहीं मिलेगा ,इन कारणों से समाज में अनैतिकता का बोलबाला हो जावेगा ,तथा मनुष्य ओर पशु के अन्दर भेद करना मुश्किल हो जावेगा !

अत: पुत्र पुत्रियों के सुयोग्य विवाह संपन्न करना हमारी सबसे बड़ी नैतिक जिम्मेदारी है ! वेही बेटे ,दामाद ,बेटी ,बहू हमारे परिवार ,कुटुम्ब ओर समाज का कल उत्तर दायित्व सम्हाल कर आने वाले युग का निर्धारण करेंगे !विवाह योग्य अच्छे वर -वधु की जानकारी प्राप्त करने के लिए उनको पारिवारिक परिचय तथा जन्माकों की आवश्यकता होती है ! इस कार्य में गहोई बन्धु पत्रिका जिसमे प्रत्येक माह वायो-डाटा प्रकाशित किये जाते है !एवं चम्बल क्षेत्रीय गहोई वैश्य सभा की वेब साइड www.gahoi.co.in के विवाह पंजीयन में अपने पुत्र -पुत्रियों की जानकारी देकर सहयोग कर सकते हैं !

 

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